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gram sabha

 #जोहार #आदिवासी_परिवार                                              "ग्राम-सभा" पढ़े-लिखे आदिवासी केंद्र सरकार के लिए काम करते हैं...या भारत सरकार/आदिवासी राज के लिए काम करते हैं??! पढ़े-लिखे आदिवासी पार्टीवाद/संगठनवाद के लिए काम करते हैं...या राजी पड़हा/मांझी परगना/मुंडा मनकी/पटेल,गमेती,तड़वी अन्य पुरखौती व्यवस्था के लिए काम करते हैं...!!!??! पढ़े-लिखे आदिवासी केंद्र सरकार के अधिनियमों के तहत खुद को संचालित करना चाहते हैं...या आदिवासी पुरखौती रूढ़ि-प्रथा के तहत खुद को संचालित करना चाहते हैं...!!!??? सभी को पता है कि एक "म्यान" में दो तलवारें नहीं समां सकती है... आदिवासी समुदाय को ही तय करना पड़ेगा कि केंद्र सरकार के अधिनियमों या पुरखौती रूढ़ि-प्रथा से हम आदिवासियों के सिस्टम और व्यवस्था को चलाना है... जो संविधान पढ़ते हैं उन्हें ही समझ आयेगा...तो फिर भारतीय संविधान पढ़ना शुरू करो... कुछ अक्ल के दुश्मन ये कहते हैं कि जब रूढ़ि और प्रथा से आदिवासी समुदाय चलता है...